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हड़ताल पर हैं PMCH के बैक बोन, सुरक्षा की कर रहे मांग

N7News Admin 30-03-2018 02:07 PM टाॅप न्यूज़

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रिपोर्ट: बिपिन कुमार 

धनबाद: 

पीएमसीएच में कल रात हुए हंगामे के बाद आज जूनियर डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं. जिससे पीएमसीएच पहुंचने वाले मरीज परेशान देखे जा रहे हैं. न ही जूनियर डॉक्टर ओपीडी में नजर आये, न ही रजिस्ट्रेशन करने वाला कार्यालय खुला. जिसके चलते मरीज वापस या तो घर लौटते दिखे या फिर दूसरे अस्पताल का रुख करते दिखे. जूनियर डॉक्टर उनके साथ की गयी मारपीट और पुलिस द्वारा किये गये लाठी चार्ज से नाराज़ हैं. 

हडताल

परिजन और जूनियर डॉक्टर के बीच जमकर हुआ था बवाल : 

गुरुवार देर रात धनबाद के पीएमसीएच में केंदुआडीह बस्ती की चार साल की बच्ची के जिंदा और मृत के विवाद में बवाल हो गया. परिजनों का आरोप था कि डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया जबकि घर ले जाने के दौरान बच्ची का शरीर गर्म और उसमें हलचल महसूस हुई थी. इसके बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा खड़ा कर दिया. परिजनों के हंगामे से भड़के जूनियर डाक्टरों और परिजनों के बीच जमकर मारपीट हुई. परिजनों ने केंदुआडीह बस्ती से समर्थकों को बुलाकर डाक्टरों पर हमला बोल दिया. मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस को दो बार लाठीचार्ज करना पड़ा. हालाँकि बाद में जाँच के बाद बच्ची को मृत ही पाया गया. लेकिन, घटना के बाद नाराज़ अस्पताल के जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं. आज ओपीडी सेवा भी PMCH में बंद रही. ऐसे में अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले धनबाद और आसपास के जिलों के मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ा. 

जूनियर डॉक्टर कर रहे सुरक्षा की मांग : 

इस घटना से घायल जूनियर डॉक्टर ने पीएमसीएच प्रशासन से अपनी सुरक्षा मांग की है. साथ ही पुलिस द्वारा डॉक्टरों पर लाठी चार्ज करना गलत बताया. डॉक्टर्स ने संबंधित पुलिस पदाधिकारी को हटाने की मांग जिला प्रशासन से की है. 

हडताल

जूनियर डॉक्टर और अधीक्षक के बीच वार्ता विफल : 

हड़ताल पर गये जूनियर डॉक्टरों की अस्पताल अधीक्षक से वार्ता हुई. जिसकी जानकारी देते हुए अधिक्षक डॉ सिद्धार्थ सान्याल ने मीडिया को बताया कि शांत भाव से बातचीत कर रहे जूनियर डॉक्टरों पर पुलिस ने लाठी चार्ज किया है. ऐसे में जूनियर आक्रोशित हैं और स्थानीय सरायढेला थाना प्रभारी पर कार्यवाई की मांग कर रहे हैं और इसी के लिए आज आउटडोर का बहिष्कार किया है. जूनियर डॉक्टर अस्पताल के बैक बोन हैं उनके सहयोग के बिना मेडिकल कालेज को चला पाना मुमकिन नहीं है. 





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