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बापू ने दो बार की थी देवघर की यात्रा, समय निकालकर चरखा पर काटे थे सूत

N7News Admin 03-10-2019 03:14 AM विशेष ख़बर

धागे से बनी गाँधी की तस्वीर।




देवघर।

सम्पूर्ण देश मे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं जयन्ती मनाई जा रही है। स्थानीय विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान तथा योगमाया मानवोत्थान ट्रस्ट के बैनर तले गाँधी जी की 150 वीं जयन्ती के अवसर पर देवघरवासियों की ओर से भारत के संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद को धागे से बनी महात्मा गाँधी की तस्वीर समर्पित की जा रही है।

आगामी 15 अक्टूबर को दिल्ली में भारतीय डाक विभाग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में विवेकानंद संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव स्वयं इस को देवघरवासियों की ओर से समर्पित करेंगे। डॉ. देव ने बताया कि देवघर से गाँधी जी का था गहरा लगाव था। स्वतंत्रता आंदोलन में वैसे तो महात्मा गांधी देश के सभी हिस्सों में पहुंचे।

बापू ने दो बार देवघर की यात्रा की थी। बापू की पहली यात्रा का मकसद संतालों व ग्रामीणों के सामाजिक सुधार तो दूसरी यात्रा भी कुछ इसी तरह की थी पर थोड़ी भिन्न और वह थी समता मूलक समाज यानि बाबा मंदिर में दलितों के पूजा-अर्चना का मसला।

3 अक्टूबर 1925 को पहली बार बापू देवघर आए और 5 अक्टूबर की शाम वह यहां से प्रस्थान कर गए। लेकिन इस दौरान वह संताल परगना की जनजातियों के सामाजिक उत्थान का ताना-बाना बुनकर उनकी जिम्मेदारी यहां के लोगों को दे गए। सन 1925 की यात्रा के दौरान गाँधी जी पुराने सदर अस्पताल के सामने गोवर्धन भवन में ठहरे थे। उस समय उनके दाहिने पैर में घुटने के नीचे घाव था। घाव के उपचार के लिए होम्योपैथ चिकित्सक डॉ. हरिपद राय को बुलाया गया। 

बापू का ठहराव करनीबाद मुहल्ला के लक्ष्मी निवास में भी हुआ। जो आज भी नौलखा मंदिर के सामने उनकी यादों को संजोये हर आने जाने वालों को उस ऐतिहासिक क्षण की याद दिलाता है। इस भवन में भी उन्होंने समय निकालकर चरखा पर सूत काटा था।





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