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गमछा विवाद पर बोलें नीलोत्पल, संस्कृति पर छींटाकसी न कर उसका सम्मान करें 

N7News Admin 18-11-2019 11:26 PM दुमका

नीलोत्पल मृणाल।



Reported by: अजय झा

दुमका।

आज सोशल मीडिया, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में गमछा प्रकरण छाया हुआ है। यह विवाद नोनीहाट के रहने वाले और देश भर में साहित्य में अपनी अलग पहचान बनाने वाले साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता नीलोत्पल मृणाल के साथ दिल्ली के एक रेस्तरां में गमछा के कारण घटी एक छोटी सी घटना से शुरू हुआ है। इन्हें दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित एक रेस्तरां में घुसने से रोक दिया गया था, क्योंकि नीलोत्पल ने अपने गले मे गमछा लटका रखा था। बता दें कि भारत संस्कृति और परंपराओं का देश है। हमारा पहनावा भी इसी सभ्यता और संस्कृति से जुड़ा है। यहां इसपर जब भी कोई विवाद खड़ा हुआ तो देश भर में ये सुर्खियों में रहा। आज देश मे बिहारियों की पहचान गमछा पर विवाद खड़ा हुआ है।

घटना 12 नवम्बर के रात 9.30 बजे की है। दिल्ली के कनॉट प्लेस के एक रेस्तरां में साहित्यकार नीलोत्पल मृणाल भोजन करने जा रहे थे। रेस्तरां वालों ने उन्हें रेस्तरां में प्रवेश करने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि उनके गले मे गमछा लटका था। रेस्तरां के मैनेजर ने उनसे कहा आप अंदर गमछा लेकर नही जा सकते, अगर अंदर जाना है तो इसे उतारना होगा। काफी बहस के बाद नीलोत्पल को अंदर भोजन करने के लिए जाने दिया गया। आज यही एक छोटी सी घटना देश के मीडिया, सोशल मीडिया में छाया हुआ है। आज से साहित्यकार नीलोत्पल मृणाल ने अपने फेसबुक वॉल पर पूरी घटना को पोस्ट किया था। इसके साथ ही गमछा पर विवाद हर मीडिया में फैल गया। उनका मानना है कि हमें अपनी सभ्यता संस्कृति और परंपराओं से बिमुख नही किया जाना चाहिए। देेश के इस नामचीन साहित्यकार नीलोत्पल मृणाल से छोटी सी बातचीत।

प्रश्न. क्या सभ्यता और संस्कृति को हीन भावना से देखना सही है?

उत्तर. किसी भी पीढ़ी के लिए सभ्यता और संस्कृति सत्य तत्व है, उसका जड़ है। इसके बिना पीढ़ियां खोखली होकर सुख जाती हैं। यह बात अलग है कि वक्त के साथ सभ्यता और संस्कृति में से कुछ रूढ़ियों को छोड़कर नए प्रगतिशील तत्व को भी शामिल करना चाहिए। यही मानव संस्कृति के लिए वक्त की परंपरा है।

प्रश्न. क्यों पहनावे को लेकर देश मे विवाद उठता है?

उत्तर. भारत जैसे विविधताओं के देश में अगर सभी वर्गों के लोग संकुचित होकर केवल अपने-अपने संस्कृति को ही सर्वश्रेष्ठ मानने की होड़ में लगे रहेंगे तो ऐसे में हम एक- एक के रहन सहन परिधान भाषा इत्यादि पर छींटाकसी करते रहेंगे। अतः विविधताओं में एकता वाला भारत बनाकर एकदूसरे की संस्कृति को रहन सहन परिधान का सम्मान करके ही बचाया जा सकता है। देश मे ऐसे विवाद होते रहते हैं। लेकिन हमें 21वीं सदी में नए भारत के लिए पुरानी सोच से बाहर आना होगा। सबकी संस्कृति का सम्मान करना होगा।

प्रश्न. संस्कृति से छेड़छाड़ की नजर से इस विवाद को देखा जा सकता है?

उत्तर. संस्कृति के साथ छेड़छाड़ मानसिकता के ही हीनता से होता है। इसके लिए तोप, बन्दूक, बारूद की जरूरत नही होती। जब गमछा हमारे पहनावे की संस्कृति का हिस्सा है तो उससे परहेज करना या उसे नीचा दिखाना संस्कृति पर हमला ही तो है।

प्रश्न. आप इस विवाद पर क्या कहना चाहेंगे देशवासियों को?

उत्तर. हम अपने खानपान और पहनावे को लेकर हैं भावना से ग्रसित ना हों।  हमे बचपन मे ही बता दिया जाता है कि सूट बूट पहनने वाले ही सभ्य होते हैं। बचपन की इसी गलती को जल्दी सुधार लेना चाहिए। हमें समझना चाहिए कि भदेश का भी अपना सांस्कृतिक सौंदर्य होता है। 

प्रश्न. क्या विवाद पैदा करने वाले रेस्तरां वाले के बारे में कुछ कहना चाहेंगे?

उत्तर. रेस्तरां ने अपनी गलती को माना है और अपने कर्मियों से गमछा डालकर खाना सर्व कराया है। इतनी जल्दी अपनी मानसिकता में सुधार लाने के लिए रेस्तरां वाले को धन्यवाद और बधाई।

प्रश्न. आप चाहते हैं कि ये आंदोलन जोरदार चले?

उत्तर. ये आंदोलन छणिक मुद्दों के लिए नही है। अपनी संस्कृति और गौरव से हमेशा लगाव समाज मे रहना चाहिए। यह आंदोलन से ज्यादा अनुकरण का मामला है।





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