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दूसरी पारी खेलने में बादल को करनी पड़ रही है कड़ी मशक्कत

N7News Admin 21-11-2019 12:31 AM विशेष ख़बर




देवघर।

झारखंड में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है । इस बार जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र में चुनाव दिलचस्प होने जा रहा है. निवर्तमान सूबे के चर्चित विधायक बादल को क्षेत्र में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।

भंडारो पंचायत सचिवालय में रहने वाले बादल पत्रलेख की सादगी की लोग मिसाल देते हैं,  खासकर सारवां में 2014 वाली लोकप्रियता व ममता नहीं होना उनके लिए परेशानी का सबब बन सकता है। हालांकि उनके समर्थक व गांव के लोग कम वोट मिलने या हार की बात को सीरे से खारीज करते हुए एक तरफा जीत होने की बात कहते हैं।

जबकि, बादल मौका मिलने के बाद क्षेत्र की जनता के लिए समर्पित रहने व जरमुंडी विस का सार्थक विकास किए जाने की बात कह मतदाता व जनता के आशीर्वाद से दूसरी बार भी जनता की सेवा का मौका मिलने की बात कहते है। गोड्डा लोकसभा के अंतर्गत आने वाले जरमुंडी विस में 2019 के लोस चुनाव में भाजपा सांसद डॉ निशिकांत दुबे को यहां से लीड मिली थी। जबकि बादल महागठबंधन के प्रत्याशी प्रदीप यादव के लिए काम कर रहे थे। वही बादल की कार्यप्रणाली में भी सादगी दिखता है किसी भी घटना दुर्घटना की खबर से लोगों के बीच दौड़कर चले आते हैं और हर सम्भव मदद भी पहुंचाते हैं। वही इस बार विकल्प की खोज को लेकर जनता में उहापोह की स्थिति में है ।

राज्य स्तर पर गठबंधन को लेकर भी अंतिम निर्णय लिया जा चुका है और काँग्रेस पार्टी की तरफ से जरमुंडी में बतौर प्रत्याशी निवर्तमान विधायक बादल ही होंगे, वही भाजपा की ओर से देवेंद्र कुंवर को प्रत्याशी बनाया गया है जेवीएम से डॉक्टर संजय कुमार के प्रत्याशी होनें की सूचना है, जबकि  लोजपा के विरेंद्र प्रधान ने पूर्व से ही दावेदारी ठोक क्षेत्र भ्रमण शुरू कर दिया था।

बहरहाल , इसको लेकर सभी संभावित प्रत्याशी क्षेत्र का सघन दौरा कर ग्रामीणों से मिलने व मतदाताओं को अपने पक्ष में गोलबंद करने का प्रयास कर रहे हैं ।

वही, अगर बीते 2014 की चुनाव की बात करें तो 43 हजार 981 मत बादल को मिला था. जो कुलमतदान का 28.83 प्रतिशत वोट था. दूसरे नम्बर पर रहे जेएमएम प्रत्यासी हरिनारायण राय को 41 हजार 273 मत प्राप्त हुआ था और बादल ने मामूली 2708 मत के अंतर से बिजय प्राप्त किया था।जबकि तीसरे नम्बर पर रहे भाजपा प्रत्यासी अभय कांत प्रसाद को 29 695 मत प्राप्त हुआ था और उस वक्त के जेबीएम प्रत्यासी देवेन्द्र कुंवर को 14 हजार 189 मत ही मिला था। 2014 में जरमुंडी विधानसभा में 1 लाख 52 हजार 573 मत दाताओं ने अपने मत का उपयोग किया था।

ज्ञात हो कि तीन बार से जरमुंडी में पार्टी नहीं व्यक्ति जीतता रहा है, फिलहाल आय से अधिक संपति के मामले में सज़ायाफ्ता पूर्व मंत्री व दो बार के निर्दलिय विधायक हरिनारायण राय को बादल ने तीसरी पारी खेलने से रोका था और पहली दफा हारने के बाद अपनी मेहनत के बदौलत दूसरे प्रयास में जीत दर्ज कर विधायक बने।

प्रत्याशी क्षेत्र में जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं. पर देखना मजेदार होगा एक डॉक्टर के मैदान में उतरने से जरमुंडी के राजनीतिक सेहत पर कितना असर पड़ता है।


विनायक





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