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जिनकी मौजूदगी से हमारा वजूद है, आज हमने ही उन्हें सड़क पर छोड़ दिया ...

N7News Admin 17-05-2020 10:05 PM देश

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By: गौतम कुमार  {Edited by:शबिस्ता आज़ाद }

देवघर।

वो देश के हर बड़ी जिम्मेदारी  उठाता है । लेकिन उसकी जिम्मेदारी किसी ने आज तक नहीं उठाई ।

हाँ, उसके कंधे पर कृषि जगत , उद्योग जगत , निर्माण जगत और तो और उनके परिवार को चलाने का बोझ है. या यूँ कहें तो देश की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक , राजनीतिक और सुरक्षा का भी बोझ इन्ही के कंधों पर है , लेकिन आज वो दुर्भाग्यवश बेबस और लाचार से पड़े हैं । ये तो राष्ट्रीय संपत्ति है न .. नहीं-नहीं ये तो राष्ट्रीय धरोहर है. इन्हें संभाल कर रखने की जरूरत है । क्योकि देश इनके बिना खड़ा नहीं हो सकता है. लेकिन सच तो ये है कि आज देश या यूँ कहें कि देश का सिस्टम इनके साथ खड़ा नहीं है . 

कुछ ऐसा व्यवहार हो रहा है, मानो वो इस देश का एक बेकार हिस्सा हो । हाँ.. बेकार हिस्सा! तभी तो इन्हें हम लावारिस सड़कों पर छोड़ चुके है । देश के सभी कार्यालयों, दुकानों, होटलों , मॉलों और आलीशान महलों का निर्माण इन्हीं ने किया है. लेकिन चार दिवारी बनाने वाले को आज एक छत मयस्सर नहीं हो रही। देश के सभी लोगों के पेट भरने के लिए अनाज भी इन्ही के खून-पसीने वाली मेहनत से तैयार होते हैं लेकिन ये आज भूखे प्यासे सड़क पर दौड़ रहे है. 

मज़दूर                                                                                                                        Concept Image 

आज जिन्हें हमारे साथ की ज़रूरत थी, आज जिन्हें हमें खुद के पास रोकने की ज़रूरत थी, आज जिन्हें मुश्किल वक्त में एक छत देने की ज़रूरत थी, आज जिन्हें दो वक़्त की रुखी-सुखी ही सही रोटी देने की ज़रूरत थी, उन्हें हमने दरकिनार कर दिया . जी हां.. ये वही मजदूर हैं जो देश निर्माण में बड़ी भूमिका निभाते हैं. 

इस बुरे वक्त से हम सभी उबर जायेंगे, लेकिन बुरे वक्त में हमारे रवैये इनके ज़ेहन में हमेशा कौंधते रहेंगे. ये जान चुके हैं हमारी हकीकत कि हम भले पैसों से अमीर हों लेकिन दिल फकीर भर भी नहीं है. हम हजार बहाने कर लें, लाख बहाने बना लें मुसीबतों का.. लेकिन वक्त आने पर ये पूछें तो जवाब दीजियेगा कि क्या वाकई आप इनसे ज्यादा अमीर हैं?

अब भी वक़्त है मजदूरों को मजदूर नहीं.. अपना विधाता समझें... संवेदनशील बनिए.. उन्हें दरकिनार करने के बजाये उनका सहारा बनें.. सोचिये अगर ये न होते तो शायद आप घर में बड़े आराम से पलंग या सोफे पर बैठ ये लेख न पढ़ रहे होते। 





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