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कहीं किसी दबाव के भेंट तो नहीं चढ़ गये पालाजोरी बीडीओ! ,संदिग्ध मौत छोड़ गये कई सवाल 

N7News Admin 13-07-2020 06:12 PM टाॅप न्यूज़

बीडीओ नागेंद्र तिवारी की तस्वीर।




जमशेदपुर/देवघर (झारखण्ड)

रेत माफिया व प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले बीडीओ नागेंद्र तिवारी की संदिग्ध हालत में मौत हो गयी। उनका शव जुगसलाई रेल की पटरी पर मिला है। रेल पुलिस को सूचना मिलते ही शव को कब्जे में लेकर एमजीएम पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया, उनका अंतिम संस्कार सोमवार को पार्वती घाट में किया गया। बीडीओ नागेंद्र तिवारी वर्तमान में देवघर जिले के पालाजोरी प्रखंड में पदस्थापित थे। पिछले एक माह से वो छुट्टी पर थे और अपने घर जमशेदपुर में रह रहे थे. सोमवार को उनकी संदिग्ध मौत की खबर ने कई सवाल उठा दिए हैं।

बीडीओ नागेंद्र तिवारी की मौत पर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता कुणाल सारंगी ने कहा कि बीडीओ नागेंद्र तिवारी की मौत की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग राज्य सरकार से की जाएगी। वहीं, भाजपा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने भी tweet कर राज्य सरकार से नागेंद्र तिवारी की मौत पर सीबीआई जाँच की मांग की है।

बीडीओ नागेंद्र तिवारी के परिजनों ने नागेन्द्र तिवारी की मौत का जिम्मेवार पालाजोरी प्रखंड क्षेत्र के एक मुखिया को बताया है। आरोप है कि मुखिया द्वारा गैर क़ानूनी तरीके से काम किया जा रहा था, जिसे बीडीओ नागेन्द्र द्वारा रोके जाने पर उनपर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा था। जिससे वो परेशान रहा करते थे। 

परिजनों ने नागेन्द्र तिवारी की मौत मामले की सीबीआई से जाँच कराने की मांग की  

परिजनों ने बताया कि बीडीओ नागेंद्र तिवारी वर्तमान में देवघर के पालोजोरी प्रखंड में कार्यरत थे। कुछ दिन पहले ही पालोजोरी प्रखंड में उन्हें शिकायत मिली थी कि मनरेगा योजनाओं में गड़बड़ी हो रही है। उनके निरीक्षण से मुखिया, पंचायत सचिव और रोजगार सेवकों में इन दिनों हडकंप मचा था। जबकि बीडीओ नागेंद्र तिवारी ने क्लियर कट कह दिया था कि कोई भी गैर कानूनी काम वह होने नहीं देंगे। इसके बाद उन पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा था। जिससे वो परेशान थे। दिवंगत बीडीओ के बड़े भाई ने बताया कि वह काफी दिनों से प्रशासनिक कार्य प्रणाली से परेशान थे। यह समझ मे नहीं आ रहा है कि नागेन्द्र दूसरों को जिंदगी देने वाला खुद की जान नहीं ले सकता। हमें शक है कि नागेंद्र ने आत्महत्या नहीं की उनका मर्डर हुआ है पुलिस इसकी जांच करें। उन्होंने कहा कि उन पर रेत माफियाओं का भी दबाव था। 4 साल में कई बार उनका ट्रांसफर हो चुका था। उन्होंने चाईबासा रेत माफियाओं पर अंकुश लगाया तो उनका ट्रांसफर देवघर पालोजोरी करा दिया गया था। जब वो पालाजोरी गए तो वहां भी गैर कानूनी काम रोकने पर नागेंद्र पर दबाव बनाया जाने लगा। 

लोकप्रिय व ईमानदार अधिकारी के तौर जाने जाते थे नागेन्द्र 

अपनी ईमानदारी के बल पर काफी लोकप्रिय व ईमानदार अधिकारी के तौर पर नागेन्द्र जाने जाते थे। उनकी लोकप्रियता और इमानदार छवि का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब उनका ट्रान्सफर तांतनगर से हुआ तो गांव के लोगो ने नम आँखो से उन्हें विदा किया था।

बंदूक से खेलने वाले बच्चों को बनाया अफसर

चाईबासा का छोटा सा ब्लॉक तांतनगर में जहां नक्सलियों के बच्चे बदूक से खेला करते थे। तो बीडीओ नागेंद्र तिवारी ने वहां लाइब्रेरी खोलकर बच्चों को खुद ही पढ़ाना शुरू किया था. और नेतरहाट में बच्चों का एडमिशन कराया. कई बच्चों को अफसर बना दिया।

गरीबी के साए में बीता नागेंद्र का बचपन,बच्चों को पढ़ाया करते थे ट्यूशन

नागेंद्र तिवारी का जन्म जमशेदपुर में ही हुआ था. तीन भाई, मां-बाप और बहन के साथ गरीबी में पले बढ़े नागेन्द्र ने कई बच्चों को पढ़ाकर अफसर बना दिया। जेल चौक स्थित बीजेपी नेता कमल ने उन्हें पानी टंकी के पास एक रूम मुहैया करा दिया था. जहां वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया करते थे और खुद भी पढ़ा करते थे। ताकि वह अपनी पढ़ाई और अपने भाई-बहनों की पढ़ाई पूरी करा सकें। खुद मेहनत कर नागेन्द्र ने प्रशासनिक सेवा में नौकरी ली थी। नागेन्द्र चतुर्थ जेपीएससी के पदाधिकारी थे। 

शोकसभा का आयोजन 

बीडीओ नागेंद्र तिवारी की मौत की सूचना मिलते ही देवघर जिला प्रशासन में शोक की लहर दौड़ गयी। समाहरणालय में डीसी समेत अन्य पदाधिकारियों व कर्मचारियों ने दो मिनट का मौन रख दिवंगत आत्मा के प्रति शोक संवेदना प्रकट की। 





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